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संयुक्त संचालक लोकशिक्षण रीवा के जारी नोटिस पर उठने लगे सवाल


रीवा : मामला पूरक परीक्षा के मूल्यांकन कार्य में लापरवाही का, कई शिक्षक विद्यालय से रिलीभ होने के बाद भी नही पहुचे मूल्यांकन केन्द्र पर नही हुई कार्यवाई रीवा आयुक्त लोकशिक्षण रीवा सम्भाग रीवा के द्वारा  जारी नोटिस पर सवाल उठने लगे है, मामला पूरक परीक्षा के मूल्यांकन कार्य में लापरवाही का है, मिली  जानकारी के मुताबिक माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश भोपाल की पूरक परीक्षा के उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य के लिये मार्तंड क्रमांक एक को सम्यक संस्था के रूप में बनाया गया था, किसी विद्यालय में मूल्यांकन का कार्य भी किया जा रहा था मूल्यांकन कार्य किए जाने वावत किसी भी कार्यालय से किसी शिक्षक को लिखित में आदेश नहीं जारी किया गया था मात्र जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से दूरभाष के माध्यम से संकुल प्राचार्यो को निर्देशित किया गया था तो वहीं कुछ संकुल प्राचार्य ने विधिवत मुक्ति पत्र जारी कर कर्मचारियों को मुक्त किया तो कुछ ने मोबाइल पर ही सूचना दी है जिनमें से कुछ कर्मचारी तो मूल्यांकन कार्य में उपस्थित हो गए लेकिन कुछ मुक्त होने के बाद भी नहीं गए, वही मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा ने 9 कर्मचारियों को इसलिए निलंबित कर दिया कि उन्हें मूल्यांकन कार्य में नहीं पाया जब की सच्चाई यह है कि वह सभी  कर्मचारी मूल्यांकन कार्य 21 तारीख से कर रहे थे । अध्यापक संगठन के दबाव पर उन सभी  को तत्काल निलंबन से बहाल किया गया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई गई जांच पर यह बात तो सामने आई की अभी लगभग 2 दर्जन से अधिक शिक्षको ने मूल्यांकन कार्य में अपनी उपस्थिति ही नहीं दर्ज करवाई उनके खिलाफ ना तो किसी तरह की कार्यवाही की गई बल्कि उनका नाम चुपचाप दबा दिया गया और जो मूल्यांकन कर रहे थे उन्हें निलंबित कर दिया गया ऐसी स्थिति में संयुक्त संचालक लोकशिक्षण रीवा ने मामले को संझान में लेकर जिला शिक्षा अधिकारी से सूची उपलब्ध कराने के लिए कहा सूची के प्राप्त होते ही एक लाइन से सभी कर्मचारियों को नोटिस जारी करना प्रारंभ कर दिया जानकारी मिली है कि संयुक्त संचालक लोक शिक्षण (जेडी) रीवा ने निलंबित कर्मचारियों को भी दुबारा नोटिस जारी की जो कि नियम विरूध बताया जा रहा है । तो वहीं बहुत से ऐसे कर्मचारी अभी भी छूटे हुये हैं जिन्हें संकुल प्राचार्यो द्वारा विधिवत मुक्त किया गया किंतु ना तो वह मूल्यांकन कार्य किए और ना ही उन्हें नोटिस जारी हुई। संकुल केंद्र क्रमांक तीन का ही यदि उदाहरण देखें तो इस विद्यालय से 4 शिक्षक मूल्यांकन कार्य के लिए मुक्त किए गए थे जिसमें से एक शिक्षक को निलंबित कर दिया गया तो वही तीन के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई । बाद में एक कर्मचारी श्रीमती अर्चना मिश्रा को नोटिस जारी की गई तो वही दो शिक्षक प्रतिभा ठाकुर और निगहत राणा के खिलाफ किसी भी तरह की कोई कार्यवाही नहीं की गई, एक बात तो साफ़ है कि इस पूरे मामले पर भाई भतीजावाद व राजनीतिक पकड़ वालो को पूरा लाभ दिया गया और उन्हे कोई भी नोटिस और नही निलंबति किया गया, बताया गया है की इस पूरे मामले मे डीईओ कार्यालय की एहम भूमिका है क्योकि अपनी गलतीयो को छुपाने के लिये नोटिस/निलंबन ओर बहाली का खेल चल रहा है, यहि उच्च स्तरीय जांच की जाय तो डीईओ कार्यालय के दो-तीन कर्मचारीयो का निलंबन हो सकता है क्योकि ये संलग्नी करण के नाम पर जमकर भ्रष्ट्राचार कर रहे है , इतना ही नही ये निजी विद्यालयो को लाभ देने के लिये जमकर फर्जीवाड़ा कर रहे है ।

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