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भोपाल के बघेलखंड भवन पहुंचा श्रीयुत श्रीनिवास तिवारी का अस्थि कलश,लोगों ने अर्पित की श्रद्धांजलि



भोपाल। विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष दिवंगत श्रीनिवास तिवारी का अस्थि कलश रविवार सुबह भोपाल लाया गया। यहां अंतिम दर्शन के लिए इसे बघेलखण्ड भवन में रखा गया।

बघेलखण्ड भवन में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, पीसी शर्मा सहित अनेक कांग्रेसियों व गणमान्य नागरिकों ने उनके दर्शन किये। इसके बाद यह कलश लेकर उनके परिजन उज्जैन को लिए रवाना हो गए। जहां से इसे धार्मिक अनुष्ठान के साथ क्षिप्रा में प्रवाहित किया जाएगा।

10 दिन पहले ही हुआ था निधन...
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी का 19 जनवरी के दिन यानि शुक्रवार को 93 वर्ष की आयु में दिल्ली अस्पताल में निधन हो गया था। अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी की तबियत पहले से खराब थी जिसके कारण उन्हें बुधवार को दिल्ली के संजयगांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

बताया जा रहा है कि अध्यक्ष श्रीनिवास को सालों से सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, जिसके चलते परीक्षण के लिए बीते बुधवार को अस्पताल ले जाया गया था, जहां पर चिकित्सकों ने भर्ती कर लिया था। जिसके बाद शुक्रवार की शाम 4 बजे अस्पताल में ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी का निधन हो गया।

व्हाइट टाइगर white tiger के नाम से थे मशहूर...
1980 और 90 के दशक में विंध्य की राजनीति व्हाइट टाइगर नाम से प्रसिद्ध श्रीनिवास तिवारी के इर्द-गिर्द घूमती थी। उनकी पहचान प्रदेश में एक दिग्गज नेता के रूप में होती थी।

दिंगवत सीएम अर्जुनसिंह भी थे कायल...
इतने ही नहीं दिंगवत सीएम अर्जुनसिंह भी उनकी राजनीति के कायल थे। वहीं दिग्विजय सिंह- तिवारी को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे। उनके ही शासनकाल में वे मप्र विधानसभा के अध्यक्ष पर काबिज हुए। पहली बार उन्होंने विस अध्यक्ष के तौर पर विस में मार्शल का उपयोग किया। इसके बाद वे सख्त विस अध्यक्ष के रूप में जाने जाने लगे। तिवारी के कांग्रेसी ही नहीं बीजेपी में भी कई अच्छे मित्र हैं। इनमें सबसे पहला नाम वहीं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर का आता है।

1973 में हुए कांग्रेस में शामिल...
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी ने ही 1948 में समाजवादी पार्टी का गठन किया। जिसके बाद 1952 में समाजवादी पार्टी से प्रत्याशी बनकर विधान सभा के सदस्‍य निर्वाचित हुए। श्रीनिवास जमींदारी उन्‍मूलन के लिए कई आंदोलन संचालित किए जिसमें कई बार उन्हे जेल भी जाना पड़ा।

सन् 1972 में समाजवादी पार्टी से मध्‍यप्रदेश विधान सभा के लिए निर्वाचित हुए। धीरे-धीरे उन्होंने राजनैतिक की ओर रूख करते हुए सन् 1973 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। जिसके बाद सन् 1977, 1980 और 1990 में विधान सभा के सदस्‍य निर्वाचित हुए।

सन् 1980 में अर्जुन सिंह के मंत्रिमंडल में लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण विभाग के मंत्री भी बने। सन् 1973 से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी और मध्‍यप्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रबंध समिति के सदस्‍य अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा की कार्य परिषद् में विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना से ही कई बार सदस्‍य बने।

सन् 1990 से सन् 1992 तक मध्‍यप्रदेश विधान सभा के उपाध्‍यक्ष रहे। बाद में सन् 1993 में विधान सभा सदस्‍य निर्वाचित होकर अक्‍टूबर 1993 से फरवरी 1999 तक मध्‍यप्रदेश विधान सभा के अध्‍यक्ष रहे। 1998 में सातवीं बार विधान सभा सदस्‍य निर्वाचित होकर फरवरी, 1999 से 12 दिसम्‍बर, 2003 तक मध्‍यप्रदेश विधान सभा अध्यक्ष पद पर रहे।

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