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आस्वासन मिला पर पानी नही अधिकारी रो रहे बजट का रोना

आस्वासन मिला पर पानी नही

अधिकारी रो रहे बजट का रोना  

राजनगर / प्रदीप मिश्रा  - 8770089979

एक तरफ जंहा साशन प्रसाशन की प्रथम प्राथमिकता लोगो को पीने के पानी की ब्यवस्था करनी है तो दुशरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ ही और है लोग पीने की पानी से जूझ रहे तो प्रसासन बजट का रोना रोकर एक दूसरे के माथे समस्या निदान को मढ रहा है।रामनगर डोला व राममंदिर में इन दिनों गर्मी के मौसम में पीने के  पानी की भीषण   समस्या चल रही है साथ ही साथ शादी ब्याह के मौसम में भी पानी ना मिल पाने के कारण पूरा परिवार सभी मिलकर   दुर दराज  से पानी ला रहे हैं क्षेत्र में हो रही पानी की समस्या को  लेकर डोला सरपंच  शान्ति देवी जनपद सदस्य शारदा मरावी ए दिनेश सिहं द्वारा  उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दी गयी एवम  7 नवम्वर को आमरण अनशन भी किया गया जिसे 8 नवम्वर को  कोतमा अनुविभागीय दंडाधिकारी मिलेेन्द नागदेव व कोतमा नयाव तहसीलदार मनीष शुक्ला द्वारा अनशन कारियो को जुस पिलाकर आमरण अनशन को तोडवया गया था। लेकिन यह सब करने के बावजूद भी सिर्फ आश्वासन ही मिला और पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है।  इस भीषण गर्मी मे 14000 से 15000 हजार अबादी वाले क्षेत्र मे सीर्फ पाँच टेकर से पानी सप्पलाई की जा रही है उस समय अनुविभागीय दंडाधिकारी  द्वारा डोला पंचायत को दो टेंकर बढाने को बोला गया था ।पंचायत के तरफ 30 दिन टेंकर चले भी लेकिन जब सरपंच द्वरा बिल बनाकर  जिला पंचायत अनुपपूर मे दिया गया तो उनका कहना था कि इस प्रकार की कोई सहायक राशी हमारे पास नही होती है एस डी एम और कलेक्टर राहत कार्य की राशी से पैसे का भुगतान कराये ।डोला रामनगर मे हो  रहे पानी की समस्या को कई बार मीडिया  के माध्यम से शासन प्रशासन को अवगत कराया गया फिर भी प्रसाशनिक अधिकारी आखः बन्द  किए हुए हैं । ग्राम वासियों का कहना है की क्षेत्र में लगे  हैंडपंप भीषण गर्मी आने के कारण सूख गए हैं कुछ हैंड पंप जिनमें से पानी तो निकलता है पर पीने योग्य नहीं है ग्राम वासियों को पीने  के पानी के लिए स्वतः चंदा  इकट्ठा कर बिजुरी से टेंकर से  मंगा कर पानी लिया जाता है। ग्राम वासियों ने कोतमा ैक्ड से मांग की गई थी कि लगातार हो रही पानी की समस्या को देखते हुए उस क्षेत्र में पाइपलाइन बिछ्वा  दीजिए जिससे क्षेत्र मे पानी की समस्या खत्म हो जाए लेकिन 8 नवंबर से लेकर आज दिनांक तक  किसी भी प्रकार का सर्वे नहीं कराया गया न पानी की कोई ब्यवस्था के लिए किसी तरह की पहल की गई।

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