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1 दिन में 2.8 लाख नौकरियों का दावा सफ़ेद झूठ: अक्षय हुँका



रोजगार मेले के नाम पर जनता को गुमराह किया है शिवराज सरकार ने

भोपाल : मध्यप्रदेश में बेरोजगारी की स्थिति बेहद गंभीर है। पिछले 2 वर्षों में बेरोजगारी 53% बढ़ गयी है। रोज 2 युवा बेरोजगारी के कारण आत्महत्या कर रहे हैं, नयी कम्पनियाँ आ नहीं रही हैं और पुरानी कंपनियां भी बंद हो रही हैं। ऐसे में मई 2018 में सरकार द्वारा घोषणा की गयी थी कि 4 अगस्त को पूरे प्रदेश के युवाओं को 1 दिन में 1 लाख नौकरियाँ दी जाएंगी। इससे पूरे प्रदेश के युवा सरकार की तरफ आशा की नजर से देख रहे थे। लेकिन एक बार फिर सरकार ने युवाओं को खुलेआम धोखा दिया है। इसे लेकर आज दिनाँक 21 अगस्त 2018 को बेरोजगार सेना द्वारा अप्सरा रेस्टोरेंट, रवींद्र भवन, भोपाल में प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की गयी। प्रेस कांफ्रेंस में बेरोजगार सेना प्रमुख अक्षय हुँका समेत कोर कमिटी सदस्य श्री विक्रांत राय, श्री प्रदीप नापित, श्री संजय मिश्रा आदि शामिल थे।

क्या है पूरा मामला:
बेरोजगार सेना द्वारा जनवरी 2018 से ही मध्यप्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी की समस्या को लगातार तथ्यों और आकड़ों समेत उठाया जा रहा था। जिस कारण प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी का विकराल रूप सबके सामने आ गया। इससे घबराकर सरकार ने आनन फानन में अप्रैल में घोषणा कर दी कि सरकार अगले 3 माह में 1 लाख युवाओं को नौकरी देगी। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वे सरकारी नहीं बल्कि प्राइवेट नौकरी दी जायेगी। सरकार ने 3 माह पूरे प्रदेश में रोजगार मेले लगाए और 4 अगस्त को बड़े-बड़े विज्ञापन देकर बताया कि 2.94 लाख लोगों को नौकरी/स्वरोजगार के लिए लोन दिया गया है। सरकार ने दावा किया कि 1,25,758 नियुक्तियां की गयी हैं और स्वरोजगार के 60 हजार और मुद्रा लोन के 1 लाख हितग्राहियों समेत कुल 2,97,069 लोगों को नौकरी/स्वरोजगार दिया गया है। जबकि वास्तविकता इससे बिलकुल अलग है।

क्या है वास्तविकता:
1) सरकार ने संख्या बढ़ाकर दिखाने और रोजगार मेलों की विफलता छुपाने के लिए रोजगार, स्वरोजगार और मुद्रा लोन के हितग्राहियों का आंकड़ा एक साथ दिया। (परिशिष्ट A)
2) भोपाल में 3 जुलाई को आयोजित जॉब फेयर का नाम "मैनेजमेंट जॉब फेयर" था और उसमें कई बड़ी कंपनियों जैसे फ्लिपकार्ट, स्नैपडील आदि थीं, लेकिन सभी कंपनियों में मैनेजमेंट की नहीं बल्कि 10 वीं पास लोगों के लिए नौकरियां थी जो डाटा एंट्री ऑपरेटर और सामान डिलीवर करने वालों के लिए थीं। (परिशिष्ट B)
3) जो नौकरियाँ रोजगार मेले में दी जा रही थी वो आम तौर पर 10 वीं पास व्यक्ति के लिए थीं। जबकि अप्लाई करने वाले अधिकतर लोग कम से कम ग्रेजुएट थे। (परिशिष्ट C)
4) इंटरनेशनल जॉब फेयर में फ्रेशर्स के लिए एक भी नौकरी नहीं थी। अनुभवी लोगों इसमें आये ही नहीं और इस जॉब फेयर के नाम पर भी केवल जनता के पैसे की बर्बादी हुई। (परिशिष्ट D)
5) सबसे प्रमुख बात यह थी कि जिन 1,25,758 "नियुक्तियों" की बात खुद कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण बोर्ड के अध्यक्ष श्री हेमंत देशमुख ने “ऑन कैमरा” कही है, दरअसल वे नियुक्तियां नहीं हैं बल्कि केवल LoI (Letter of Intent, आशय पत्र) हैं।जिसका उतना ही मतलब है जितना MoU का। खुद मुख्यमंत्री अनेकों बार मंच से MoU को कागज़ का टुकड़ा बोल चुके हैं। साफ़ तौर पर युवाओं को नौकरी के नाम पर आशय पत्र देकर बेवक़ूफ़ बनाया गया है। (परिशिष्ट E)
बेरोजगार सेना की सरकार को चुनौती:
बेरोजगार सेना प्रमुख अक्षय हुँका ने सरकार और रोजगार निर्माण बोर्ड के अध्यक्ष श्री हेमंत देशमुख को खुली चुनौती दी कि या तो वे
(1) 2,97,069 हितग्राहियों का नाम, फ़ोन नंबर और ऑफर लेटर या लोन के डाक्यूमेंट्स जारी करे।
(2) इंटरनेशनल जॉब फेयर में कितने लोगों को नौकरी मिली उनकी संख्या और अन्य जानकारी सार्वजानिक करे।
अन्यथा युवाओं को झूठ बोलना और ठगना बंद करें और जनता से माफ़ी मांगें।

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