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सोमनाथ चटर्जी- भारतीय राजनीति के एक दिग्गज नेता एवं उत्कृष्ट सांसद



कोलकाता :  भारतीय राजनीति के एक दिग्गज नेता एवं सांसद सोमनाथ चटर्जी देश के पहले ऐसे कम्युनिस्ट नेता थे जो लोकसभा का अध्यक्ष बने।
 
अपने जीवन के अधिकांश समय मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से जुड़े रहे सोमनाथ चटर्जी लोकसभा के सबसे उत्कृष्ट वक्ताओं में से एक थे।
 
उनके पिता एन सी चटर्जी कभी ‘अखिल भारतीय हिन्दू महासभा’ के अध्यक्ष रहे थे।
 
चटर्जी संप्रग-1 सरकार के दौरान 2004 में सर्वसम्मति से लोकसभा अध्यक्ष चुने गये थे।
 
माकपा नेता ज्योति बसु के करीबी रहे चटर्जी को 2008 में माकपा ने ‘‘पार्टी के रुख से गंभीर रूप से समझौता करने’’ के सिलसिले में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने से मना कर दिया था। उनका मानना था कि लोकसभा अध्यक्ष का पद किसी दलगत राजनीति से स्वतंत्र और निष्पक्ष है।
 
जुलाई 2008 में माकपा ने यूपीए सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था। इसके बाद पार्टी ने उन्हें लोकसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के लिए कहा था। चटर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। प्रकाश करात तब माकपा के महासचिव थे।
 
चटर्जी ने 23 जुलाई, 2008 को ‘‘अपने जीवन के सबसे दुखद दिन’’ बताते हुये एक बयान में कहा था, ‘‘लोकसभा का अध्यक्ष अन्य सदनों के अध्यक्ष के तरह ही किसी एक पार्टी के लिए काम नहीं करता है और न ही किसी राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्त्व करता है।’’
 
उन्हीं की पहल पर 5 जुलाई 2006 से शून्यकाल की कार्यवाही का सीधा प्रसारण शुरू किया गया।
 
चटर्जी के कार्यकाल के दौरान ही जुलाई, 2006 में पूर्ण रूप से 24 घंटे चलने वाला लोकसभा टेलीविजन चैनल शुरू किया गया।
 
चटर्जी माकपा के टिकट पर लोकसभा के लिए 10 बार चुने गये। उनके संसदीय सफर की शुरुआत 1971 में हुई जब उन्होंने पश्चिम बंगाल के वर्धमान सीट पर माकपा के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की थी। वह सीट उनके पिता के निधन के बाद खाली हुई थी।
 
उन्हें अपने जीवन में सिर्फ एक बार पराजय का सामना करना पड़ा, जब 1984 में ममता बनर्जी ने उन्हें हरा दिया था। ममता बनर्जी इसी जीत के साथ भारतीय राजनीति में उभरीं।
 
 चटर्जी 1989 से 2004 तक लोकसभा में माकपा के नेता थे।
 
उनका जन्म 25 जुलाई, 1929 को असम के तेजपुर में हुआ था। उनके पिता निर्मल चंद्र चटर्जी अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के अध्यक्ष रहे थे और उनकी मां का नाम वीणापाणी देवी था। उनकी शिक्षा-दीक्षा कोलकाता और ब्रिटेन में हुई।
 
ब्रिटेन के मिडल टेंपल से वकालत पास करने वाले चटर्जी 1968 से 2008 तक करीब चार दशक तक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य रहे।
 
चटर्जी को 1996 में ‘उत्कृष्ट सांसद पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था। अपने तर्क कौशल के लिए मशहूर चटर्जी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों की व्यापक जानकारी थी।
 
वह कई संसदीय समितियों में सदस्य या अध्यक्ष पद पर सुशोभित रहे। विभिन्न पार्टियों के नेता उनका बहुत सम्मान करते थे।
 
लोकसभा के अध्यक्ष के तौर पर 2009 में कार्यकाल खत्म होने के साथ ही उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया था।
 
माकपा के दिग्गज नेता ज्योति बसु के साथ उनका गहरा संबंध था। बसु ने उन्हें पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (डब्ल्यू बीआईसी) का अध्यक्ष बनाया था। उनपर राज्य में निवेश लाने और नये उपक्रम की शुरुआत करने की जिम्मेदारी थी।
 
उनके परिवार में पत्नी रेणु चटर्जी, एक बेटा और दो बेटियां हैं।

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