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विधानसभा चुनाव जीतने भाजपा इस बार लगायेगी नए चेहरों पर दांव

भोपाल। विधानसभा चुनाव जीतने के लिए भाजपा इस बार नए चेहरों पर दांव लगाने की तैयारी में है। सबसे ज्यादा टिकटों की कटौती संघ के गढ़ मालवा-निमाड़ में होगी, जहां भाजपा के पास 66 सीटों में से 56 सीट हैं। इनमें से करीब 25 विधायकों के टिकट काटे जा सकते हैं। साथ ही मध्यभारत में क्षेत्र में भी विधायकों के टिकट काटने पर मंथन चल रहा है।

मप्र में मालवा-निमाड़ को भाजपा एवं संघ का गढ़ माना जाता है, इस क्षेत्र में संघ की मजबूत पकड़ है, लेकिन आगामी चुनाव में भाजपा की हालत पतली बताई जा रही है। हाल ही में भाजपा और संघ पदाधिकारयों के बीच हुई गोपनीय बैठक में तय किया गया है कि गढ़ बचाने के लिए इस बार आधे से ज्यादा मौजूदा विधायकों के टिकट काटे जाएंगे। खासकर अपराधिक छवि के विधायकों की तो हर हाल में छुट्टी होना तय है। मालवा में 37 एवं निमाड़ में 29 विधानसभा सीट हैं। यानी इस क्षेत्र में 66 विधानसभा सीट हैं, जिनमें से 56 सीट भाजपा के कब्जे में हैं, जबकि कांगे्रस के पास  महज 9 सीट हैं। इसी तरह मध्यभारत भी संघ का प्रांत हैं। जिसमें भोपाल, ग्वालियर-चंबल संभाग आते भी आते हैं। इस भोपाल होशंगाबाद में 36विधानसभा सीटों में से 29 भाजपा एवं 6 कांग्रेस के पास हैं। इसी तरह ग्वालियर-चंबल में 34 सीटों में से 20 सीट भाजपा एवं 12 सीट कांग्रेस के पास हैं। संघ एवं भाजपा के सर्वे में इन क्षेत्रों में पार्टी की हालत सबसे खराब है। ऐसे में यह तय किया गया कि कार्यकर्ता एवं जनता की नाराजगी दूर करने के लिए ज्यादा से ज्यादा विधायकों के टिकट काटे जाएंगे।

निमाड़ में ज्यादा खतरा

निमाड़ (उज्जैन संभाग) की 29 सीटों में से 28 सीटों पर भाजपा का कब्जा है। सिर्फ मंदसौर जिले में एक सीट कांग्रेस के पास है। इस क्षेत्र में भाजपा को आधी सीटें खोने का खतरा है। ऐसे में  विवादित और दागी चेहरों को बदला जाना तय है। साथ ही ऐसे विधायक, जिनकी सर्वे रिपोर्ट खराब आई है, उनका भी टिकट कटना है।

टिकट चयन में संघ का रहेगा दखल

मालवा-निमाड़ में नए चेहरोंं को टिकट देने में संघ की रिपोर्ट की अहम भूमिका रहेगी। हालांकि संघ की ओर से किसी नेता विशेष के नाम पर जोर नहीं दिया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के प्रवास के दौरान संघ अपनी रिपोर्ट दे चुका है। शाह के दखल के बाद ही मप्र भाजपा ने संघ की रिपोर्ट पर अमल करना शुरू किया है। इस क्षेत्र में संघ ने जमीनी स्तर पर काम करना भी शुरू कर दिया है।

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