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पाला से बचाव हेतु करे उपाय

पाला से बचाव हेतु करे उपाय

अनूपपुर / प्रदीप मिश्रा - 8770089979

कृषि विज्ञान केन्द्र, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकण्टक अनूपपुर द्वारा ग्राम लपटी, आमगवा क्षेत्र का भ्रमण किया गया इस दौरान किसानों के खेतो का भ्रमण कर समसामायिक सलाह दी गई । भ्रमण के दौरान संदीप चैहान वैज्ञानिक (कृषि प्रसार) कृषि विज्ञान केन्द्र, अमरकण्टक, योगेश कुमार वैज्ञानिक ( कृषि वानिकी) कृषि विज्ञान केन्द्र अमरकण्टक जिला अनूपपुर के वैज्ञानिक उपस्थित रहे ।
इस दौरान श्री चैहान वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केन्द्र ने भ्रमण के दौरान किसानों को पाले से बचाने के लिए उपाय बतायें खेत के चारो ओर धूंआ करे धंवा करने हेतू नम घास व टहनियो ढेरी को बनाकर 4-5 जगह पर जलाये इससे खेत के उपर धूए की परत बन जाती है इससे तापमान मे गिरावट आती है जिससे फसल पर पाले के नुकसान से बचा जा सकता है । खेत में हल्की सिंचाई करे संभव हो सके तो स्प्रिकंलर से सिंचाई करे, मिटटी मे नमी होने से भी पाले का प्रकोप कम होता है । सल्फर पावडर 8-10 किग्रा प्रति एकड की दर से भुरकाव करे या घुलनशील सल्फर /वेटेबल सल्फर 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिडकाव करे ।

पाला क्या है ?

अनिल कुर्मी,वैज्ञानिक, फसल सुरक्षा, कृषि विज्ञान केन्द्र, ने बताया सर्दी के मोसम में दिसम्बर एवं जनवरी माह में ठण्ड की लहर चलती है और रात का तापमान कम हो जाता है । जब तापक्रम लगातार कम होता जाता है । जब तापमान  5 डिग्री सेन्टीग्रेड से कम हो जाता है, तो फसलों के अंदर उपस्थित पानी जम जाता है,  जिससे कोषिकाभित्त फट जाती है तथा तरल  पदार्थ बाहर की तरफ आ जाते है तथा पौधा मुरझा / झुलस जाते है ।

पाला की स्थिति कब निर्मित होती है

रात्रि का तापमान लगातार 5 डिग्री सेन्टीग्रड से नीचे चला जाये, आसमान में बादल न रहे तथा सुबह -सुबह जब हवा चले तब पाले की संभावना बनती है। किसान भाई खेती की समस्या के समाधान हेतु कृषि विज्ञान केन्द्र, इंदिरा गंाधी जन जातीय विश्व विद्यालय अमरकण्टक के कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क कर सकते है श्री संदीप चैहान, वैज्ञानिक कृषि प्रसार मो. 7000082560, श्री अनिल कुर्मी, वैज्ञानिक फसल सुरक्षा मो. 9425622616, श्री योगेश कुमार, वैज्ञानिक, कृषि वानिकी मो. 7898370746 है।

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