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CM कमलनाथ का पलटवार, "शिवराज चिंता ना करे, हर वादा पूरा करेगी सरकार"



भोपाल : पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ सरकार की कर्जमाफी की घोषणा को लेकर सवाल उठाये हैं। उन्होंने कहा है कि दस दिन में कर्ज माफ़ी का वादा था, लेकिन 25 दिन बाद भी कारजमाफी की घोषणा अमल में नहीं आई। वहीं उन्होंने इसके बजट पर भी सवाल उठाये हैं| जिसके जवाब में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी पलटवार किया है| उन्होंने कहा है कि जिसको लोग घोषणा वीर कहते है। जिनके कार्यकाल में की गई हजारों  घोषणाएं आज भी अधूरी है, वो हमारी 22 दिन की सरकार को हमारी घोषणा याद दिला रहे है।

कमलनाथ ने कहा शिवराज की मनोदशा हम समझ रहे है। सत्ता से हटने के ग़म से वे अभी तक उबर नहीं पा रहे है। अभी उन्हें विपक्ष में बैठे मात्र 22 दिन ही हुए है। अभी तो उन्हें वर्षों आराम करना है। उनकी हड़बड़ाहट व बेचैनी समझी जा सकती है।  चिंता ना करे, हमारी सरकार हर वादा पूरा करेगी। किसान हमारे साथ खड़ा है। हम पर उसे पूरा विश्वास है।उसे पता है कि जो हमने कहा है , वो पूरा ज़रूर करेंगे।

1 घंटे में ही क़र्ज़ माफ़ी के आदेश जारी कर दिये,  फिर केसी वादाखिलाफ़ी ?
सीएम ने कहा जिस शिवराज ने अपने 13 वर्षीय कार्यकाल में किसानो का एक ढेला का क़र्ज़ भी माफ़ नहीं किया। निरंतर किसानो की क़र्ज़माफ़ी का उन्होंने व उनके मंत्रियो ने मज़ाक़ उड़ाया। क़र्ज़ माफ़ी से वे मुकरते रहे। वो आज किस मुँह से क़र्ज़माफ़ी पर सवाल पूछ रहे है ? उन्हें क़र्ज़माफ़ी पर तो बात करने तक का भी हक़ नहीं है।  ख़ुद कह रहे है कि राहुल जी ने घोषणा की थी कि सरकार बनते ही 10 दिन में किसानो की क़र्ज़माफ़ी की घोषणा कर देंगे। हमने तो सरकार बनते ही 1 घंटे में ही क़र्ज़ माफ़ी के आदेश जारी कर दिये। फिर केसी वादाखिलाफ़ी ?

वो कह रहे है कि क़र्ज़ माफ़ी पर कोई अर्ज़ी , आवेदन मत लो।  में उनसे पूछना चाहता हूँ कि यूपी , महाराष्ट्र में भी क़र्ज़ माफ़ी की घोषणा हुई है। वहाँ भी किसानो से आवेदन लिये गये। कब किसानो के खाते में राशि आयी, यह उनसे भी पूछ ले शिवराज । हर चीज़ की एक प्रक्रिया होती है। उसका पालन करना पढ़ता है।
जो खजाना खाली कर गए वो बजट पर सवाल उठा रहे
उन्होंने कहा हम क़र्ज़ माफ़ी के फ़ैसले को अमल में लाना चाहते है। यह शिवराज सरकार नहीं है। जिसमें हड़बड़ी वाली सिर्फ़ घोषणाएँ ही की जाती थी , उन पर अमल नहीं। यह सही है कि शिवराज की सरकार सिर्फ़ घोषणा रूपी कोरी मुँह ज़बानी पर ही चलती थी। इसलिये काग़ज़ी प्रक्रिया नहीं होती थी। लेकिन हम पूरी प्रक्रिया  का पालन कर रहे है। आश्चर्य इस बात का हो रहा है कि जो खजाना खाली कर गए वो बजट पर सवाल उठा रहे हैं।

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