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गोपाल भार्गव होंगे मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष, विधायक दल की बैठक में लगी मुहर



भोपाल : बीजेपी विधायक दल की बैठक सम्पन्न हो चुकी है| मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के लिए पूर्व मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव के नाम पर मुहर लगी है। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने राजनाथ सिंह और विनय सहस्त्रबुद्धे को नेता प्रतिपक्ष चुनने की जिम्मेदारी सौंपी थी। पार्टी ने पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव को नेता प्रतिपक्ष बनाने का निर्णय लिया है।  नेता प्रतिपक्ष का नाम का ऐलान करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह भोपाल आए। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भूपेंद्र सिंह, डॉ.नरोत्तम मिश्रा ने सिंह का स्वागत किया। इसके बाद राजनाथ सिंह, डॉ विनय सहस्त्रबुद्धे भाजपा कार्यालय पहुंचे। यहां भाजपा विधायक दल की बैठक आयोजित की गई ।

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के इस रेस में शामिल नहीं होने के बयान के बाद से ही गोपाल भार्गव का नाम तय माना जा रहा था| वहीं पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम भी चर्चा में रहा। पार्टी ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर ब्राह्मण चेहरे पर दांव लगाया है। पूर्व मंत्री और पंद्रहवीं विधानसभा में वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव आठवीं बार विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए हैं। प्रदेश में सबसे ज्यादा विधानसभा चुनाव जीतने वाले पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के बाद गोपाल भार्गव ही ऐसे नेता है जो लगातार इतने चुनाव जीत चुके हैं। ब्राह्मण समाज से आने वाले भार्गव को नेता प्रतिपक्ष बनाकर भाजपा आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सवर्णों को साधने की कोशिश की है। साथ ही भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष के लिए आदिवासी कार्ड खेलते हुए विजय शाह को उम्मीदवार बनाया है।

गोपाल भार्गव के बारे में
गोपाल भार्गव वर्ष 1982 से 1984 तक नगर पालिका गढ़ाकोटा के अध्यक्ष रहे। इसके बाद वे सागर की रहली विधानसभा सीट का विधानसभा में प्रतिनिधित्‍व करते आ रहे हैं। श्री भार्गव 1985 में विधानसभा सदस्य चुने गये। वर्ष 1985 के बाद वे निरंतर विधानसभा के सदस्य हैं। श्री भार्गव को 8 दिसंबर, 2003 को उमा भारती के मंत्रिमंडल में केबिनेट मंत्री के रूप में शामिल कर कृषि, राजस्व, धार्मिक न्यास और धर्मस्व, पुनर्वास व सहकारिता विभाग का दायित्व सौंपा गया। 28 जून 2004 को हुए मंत्रिमंडल के पुनर्गठन के बाद एक जुलाई 2004 को कृषि एवं सहकारिता विभाग का उत्तरदायित्व सौंपा गया। इसके बाद भार्गव को 27 अगस्त 2004 को मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में शामिल किया गया। वहीं भार्गव को 4 दिसम्बर 2005 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में शामिल कर मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। गोपाल भार्गव को कृषि और सहकारिता विभाग का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया। दिसंबर 2008 में सम्पन्न विधान सभा चुनाव में छटवीं बार रहली विधानसभा से विधायक निर्वाचित हुये। श्री भार्गव को 20 दिसंबर 2008 को शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में शामिल कर मंत्री पद की शपथ दिलाई गई।  भार्गव वर्ष 2013 में पुनः रहली विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। उन्होंने 21 दिसम्बर, 2013 को केबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। 2018 में भी वे आठवीं बार जीते, रहली सीट पर भार्गव ने इस बार कांग्रेस उम्‍मीदवार कमलेश्वर साहू को 26 हज़ार से ज़्यादा वोटों से शिकस्‍त दी है। लेकिन इस बार भाजपा सत्ता से बाहर है, पर गोपाल भार्गव महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाएंगे| उन्हें विधायक दल का नेता बनाया गया है।

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