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सपाक्स फिर आंदोलन के मूड में, 19 जनवरी को अनारक्षित वर्ग को आरक्षण पर परिचर्चा



भोपाल : सामान्य पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी/कर्मचारी संस्था (सपाक्स) ‘‘पदोन्नति में आरक्षण’’ के संविधान विरूद्ध नियमों को समाप्त करने के लिये विगत् 3 वर्षों से संघर्ष कर रही है। सरकार ने माननीय उच्च न्यायालय से जीत के बाद भी अभी तक न तो नियमों में परिवर्तन किया है, न ही निर्णयानुसार गलत ढंग से पदोन्नत शासकीय सेवकों को पदावनत किया है।

राजनैतिक दलों ने आरक्षण को एक ऐसी पतवार बना लिया है, जिससे हर कोई अपनी नाव पार लगाना चाहता है। इसी का ताजा उदाहरण है, अनारक्षित वर्ग को आर्थिक आधार 10 प्रतिशत आरक्षण जो संविधान संशोधन कर माननीय न्यायालय की निर्धारित सीमा 50 प्रतिशत के अतिरिक्त दिया गया है।

संभवतः 5 राज्यों में हार का संज्ञान लेते हुये केन्द्र सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर सभी वर्गों /जातियों को आरक्षण दिये जाने का प्रावधान किया है, सपाक्स व सपाक्स समाज की आवाज सरकार तक पहुँची इसका हम स्वागत करते हैं। लेकिन सपाक्स की मांग है कि आरक्षण सभी वर्गों को एकमात्र आर्थिक आधार पर 50 प्रतिशत की निर्धारित सीमा में हर वर्ग की आबादी के समानुपातिक दिया जावे ताकि न तो योग्यता का हनन् हो न ही किसी वर्ग विशेष से भेदभाव। अनु जाति /जनजाति वर्ग का एक बड़ा तबका आरक्षण का लाभ तो दूर नाम से भी परिचित नहीं है, जबकि कुछैक परिवार पीढ़ियों से इसका लाभ लेकर एकाधिकार जमा बैठे हैं।

सपाक्स और सपाक्स समाज सदैव संवैधानिक व्यवस्थाओं से इतर आरक्षण और सामाजिक भेदभाव की नीतियों का विरोध करती रही है। सरकार द्वारा न्यायालयीन निर्णय के बावजूद एट्रोसिटी एक्ट में एक ऐसे वर्ग के पक्ष में संविधान संशोधन कर न्यायालय के निर्णय को शून्य कर दिया, जो ‘‘विध्वंस और जानमाल की हानि’’ को देशहित समझता है। 2 अप्रैल 2018 को जिस प्रकार की स्थितियाँ देश में निर्मित की गई वे अत्यंत निंदनीय थी। इन नीतियों के विरोध में सपाक्स समर्थित 6 सितम्बर 2018 को ऐतिहासिक शांतिपूर्ण बंद से एक सार्थक संदेश दिया गया था।
नई सरकार की यह घोषणा कि 2 अप्रैल के हंगामें और उत्पात में शामिल लोगों के विरूद्ध दर्ज प्रकरण वापिस लिये जायेंगे, पूर्णतः संविधान और जनसामान्य का अपमान है। सपाक्स एवं सपाक्स समाज संस्था इसका विरोध करती है और अपील करती है कि ऐसे भेदभाव पूर्ण निर्णय वापस लिये जावें।

अब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। यह दुर्भाग्य पूर्ण है कि वर्तमान सरकार ने पुनः उन्हीं नीतियों पर चलने का फैसला किया है, जिनके कारण विगत सरकार ने खामियाजा उठाया है। जहॉ एक ओर वर्ग विशेष के मंत्रीगण अपने वर्ग के हित मात्र की बात करते हैं वहीं सरकार घोषणा करती है कि अनु.जाति /जनजाति व पिछड़े वर्ग के छात्रों को परीक्षा व इंटरव्यू के लिए यात्रा का खर्च सरकार उठाएगी। अब जबकि केन्द्र की भाजपा सरकार द्वारा आर्थिक आधार पर आरक्षण से वंचित सभी वर्गों को आरक्षण की व्यवस्था कर यह संदेश दिया गया है कि वह सामान्य एवं अल्पसंख्यक वर्ग के लिये भी कुछ करना चाहती है ऐसे में म.प्र. की कांग्रेस सरकार द्वारा अनु.जाति एवं जनजाति व पिछड़े वर्ग के पक्ष में लिये गये उक्त निर्णय से यह प्रतीत हो रहा है कि वह सामान्य एवं अल्पसंख्यक वर्ग के प्रति भेदभाव की नीति अपनाना चाहती है। सरकार गरीबों की शिक्षा, परीक्षा, इंटरव्यू आदि हेतु होने वाली यात्राओं का खर्चा वहन करे, न कि जाति के आधार पर। संस्था यह मांग करती है कि प्रदेश की नवगठित कांग्रेस सरकार सभी वर्गों से समानता का व्यवहार करते हुये अपनी नीतियों केा आर्थिक आधार पर लागू करें न कि जाति/वर्ग के आधार पर।

संस्था प्रदेश में बेरोजगारी की स्थिति, शिक्षित युवाओं के संविदा / कांटे्क्‍ट पर रखकर शोषण तथा समान्य पिछड़ा वर्ग के खाली पदों पर नियुक्तियॉ न करने का भी विरोध करती है। संस्था अपेक्षा करती है कि भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुकी ''व्‍यापम''जैसी संस्थायें सरकार तत्काल बंद करें, जो योग्यता का हनन कर सरकारी तंत्र को खोखला कर रही है।

सपाक्स एवं सपाक्स समाज लगातार नई सरकार में मंत्रियों से मिलाकर न्याय की गुहार लगा रहा है। माननीय मुख्यमंत्री जी से भी इस संबंध में मुलाकात का समय चाहा गया है, दुर्भाग्य से अभी तक माननीय मुख्यमंत्री द्वारा मुलाकात हेतु समय नहीं दिया गया है, जो खेदपूर्ण है। सपाक्स व सपाक्स समाज पूर्व सरकार की भेदभाव पूर्ण नीतियों और दमन का विरोध करता रहा है एवं अब यदि वर्तमान सरकार द्वारा भी पूर्व सरकार की भांति नीतियाँ अपनाई जाती हैं तो पुनः प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शनों की श्रृंखला प्रारंभ की जावेगी।

सरकार से हमारी अपेक्षा है कि पूर्व सरकार की भांति अन्यायपूर्ण नीतियों को त्यागकर पदोन्नतियों की प्रक्रिया माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय अनुरूप तत्काल प्रारंभ करे एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ के निर्णय दिनांक 26-09-2018 अनुसार नवीन पदोन्नति नियम लागू करें। अनावश्यक रूप से पूर्व सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर उलझाई गई व्यवस्था वापिस बनाने हेतु तत्काल शासन सर्वोच्‍च न्‍यायालय से अपील वापिस ले तथा सेवानिवृत्त हो चुके शासकीय सेवकों को माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय अनुसार पदोन्नतियॉ का पूर्ण लाभ देते हुए उनके पेंशन आदि प्रकरणों का निष्पादन करे।

सपाक्स संस्था दिनांक 19 जनवरी 2019 को संविधान संशोधन कर अनारक्षित वर्ग को आरक्षण पर एक परिचर्चा के साथ दिनांक 03 फरवरी 2019 को प्रांतीय सम्मेलन कर विरोध की रूपरेखा तैयार कर आगामी माह में विरोध प्रदर्शन प्रारंभ करेगी।

प्रेस वार्ता में सपाक्‍स संस्‍था के संस्‍थापक अजय जैन,आलोक अग्रवाल, आर.बी.रायसहित संस्‍था के प्रदेश अध्‍यक्ष डॉ. के. एस. तोमर, उपाध्‍यक्ष देवेन्‍द्र सिंह भदौरिया, सचिव राजीव खरे, संस्‍था सदस्‍य राजेश तिवारी, राकेश मुंशी, डॉ. एस. के. श्रीवास्‍तव, डॉ. पी.पी. सिंह तथा सपाक्‍स समाज संस्‍था के प्रदेश अध्‍यक्ष डॉ. कांतीलाल साहू, सचिव भानू तोमर, कोषाध्‍यक्ष पवन राजावत, युवा संगठन के प्रदेश अध्‍यक्ष अभिषेक सोनी, सचिव प्रसंग परिहार, मीडिया प्रभारी प्रवीण तिवारी, प्रदेश प्रचारक चेतन सिंह चंदेल, राहुल राजपूत सहित बडी संख्‍या में अन्‍य कार्यकर्ता उपस्थित थे।


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