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नगर पंचायत अमरकंटक में बाड चर रही खेत. अंगद की तरह पांव जमाए कर्मचारी कर रहे भ्रष्टाचार.

नगर पंचायत अमरकंटक में बाड चर रही खेत.

अंगद की तरह पांव जमाए कर्मचारी कर रहे भ्रष्टाचार.

अनूपपुर /प्रदीप मिश्रा - 8770089979

मां नर्मदा की उद्गम स्थली पवित्र नगरी अमरकंटक में अंगद के पांव की तरह वर्षो से जमे कर्मचारियों की करतूतों की गंध से यहाँ की जनता परेशान हो उठी है। पहली बार भीषण जल संकट की मार झेल रहे अमरकंटक के निवासियों के सब्र का बांध फूटने लगा है। परेशान जनप्रतिनिधियों ने मंगलवार ,४ जून को जिले के मुखिया से अपनी गुहार लगाई । कलेक्टर चन्द्र मोहन ठाकुर से जन सुनवाई की मांग करते हुए नगरपंचायत परिषद की की अध्यक्ष श्रीमती प्रभा पनाडिया, पार्षद श्रीमती अंजना कटारे  सहित 8 पार्षदों ने सी एम ओ तथा स्थानांतरित उपयंत्री को तत्काल  हटाने की मांग की है। 

संभाग आयुक्त एवं कलेक्टर से की मांग 

जनसुनवाई में कलेक्टर श्री ठाकुर एवं कमिश्नर के नाम सॊंपे मांगपत्र मे अमरकंटक नगर पंचायत की अध्यक्ष प्रभा पनारिया सहित विभिन्न वार्डॊं  के 8 पार्षद ने अपने हस्ताक्षर सहित सीएमओ नगर पंचायत अमरकंटक सुरेंद्र सिंह उइके एवं उपयंत्री बृजेश पाण्डेय  के खिलाफ कलेक्टर को शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया  है कि अमरकंटक नगर पंचायत  क्षेत्र में किसी प्रकार के विकास कार्य नहीं किए जा रहे हैं । सीएमओ नगर पंचायत मुख्यालय में नहीं रहते, जिसके कारण से वहां के जनप्रतिनिधि ,अध्यक्ष सहित सभी पार्षद परेशान हैं । वे किसी भी काम को वह नहीं करा पा रहे, ऐसे में जनता उनसे पेयजल, स्वच्छता ,   विकास की बात करती है,सवाल पूछती है। क्षेत्र से जुड़ी समस्या की बात करती है । जिसे बिना सीएमओ की उपस्थिति के नहीं पूर्ण करवा पाते। अध्यक्ष प्रभा पनारिया का कहना है कि सीएमओ मुख्यालय में नहीं रहते मैं अखिर बात करूं तो किससे ? नगरीय क्षेत्र में लगातार जल स्तर गिरा है ।पानी की समस्या है । नर्मदा भी सूख गई हैं।  लेकिन इन सभी बातों से नगर पालिका का कोई लेना देना नहीं।  

 गुणवत्ता विहीन हैं कार्य

भाजपा कांग्रेस दोनों दलों  के पार्षद लिखित शिकायत दर्ज कराने आज जनसुनवाई के दिन पहुंचे । पार्षदों का कहना है हम अपने वार्ड में गुणवत्ता युक्त काम चाहते हैं ।‌पर यहाँ विगत वर्षों में जो भी निर्माण कार्य हो रहे हैं वह भ्रष्टाचार के कारण गुणवत्ता हीन हो रहे हैं। जिसके कारण जनता के आक्रोश को उन्हें झेलना पड रहा है ।  ऐसे में सभी पार्षद एवं नगर पंचायत की अध्यक्ष  ने कलेक्टर अनूपपुर से नगर पंचायत अमरकंटक के स्थानांतरित कर्मचारियों को तत्काल हटायेे जाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है यदि समय रहते नहीं हुई कार्यवाही तो सभी पार्षदों के साथ हड़ताल मैं  बैठेगी ।

जमकर हुआ दोहन

उल्लेखनीय है कि पिछले ७५ वर्ष की सबसे बडी गर्मी २०१९ मे पडी है। इस वर्ष यहाँ पारा रिकार्ड ४५+ पार हो गया। जिले के विभिन्न हिस्सों से जल संकट की भयावह तस्वीर सामने आ रही है। कुछ स्थानों मे निर्माण कार्य के लिये लगे टैंकरों को रोककर महिलाओं द्वारा पानी भरने की तो कुछ स्थानों से गहरे कुंओं मे उतर कर पानी निकालने की खबरें आ रही हैं। कमोबेश हर जगह कम - ज्यादा ऐसी ही तस्वीर देखने को मिल रही है। 
अनूपपुर जिला मुख्यालय सहित बिजुरी, कोतमा, आमाडांड, राजनगर के साथ इस वर्ष पवित्र नगरी अमरकंटक मे अपने उद्गम स्थल पर ही नर्मदा सूख गयी। यहाँ पूर्व कलेक्टर के के खरे के मार्गदर्शन मे सात बडे डैम बनवाए गये थे। इसके कारण यहाँ कभी पानी की कमी नहीं हुई । इस वर्ष यहाँ के बांधों से निर्माण कार्यों के लिये इस कदर जलादोहन किया गया कि इसमे अब कीचड ही बचा है। 

अमरकंटक मे कहने को नर्मदा उद्गम  मन्दिर न्यास

अमरकंटक विकास प्राधिकरण तथा नगर पंचायत तीन प्रमुख संस्थाएं हैं , जिन पर अमरकंटक के समग्र विकास की जिम्मेदारी है। तीनों संस्थाओं मे कमिश्नर, कलेक्टर, एसडीएम के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सीधे सहभागिता है ।आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि उक्त तीनों संस्थाओं मे समान कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। अर्थात जो नगर पंचायत में उप यंत्री है, वही विकास प्राधिकरण मे भी टांग जमाए हुए है। जो नगर पंचायत मे बाबू है ,वही प्राधिकरण मे & वही उद्गम मन्दिर ट्रस्ट मे भी जडे जमाए हुए है।विगत कुछ वर्षों मे संभाग मे तेजी से कमिश्नर ,कलेक्टर ,एसडीएम का स्थानांतरण हुआ है। परिणाम यह निकला कि निचले स्तर के कर्मचारियों द्वारा अमरकंटक मे विकास कार्य के नाम पर जमकर मनमानी की गयी। 

अमरकंटक की पर्यावरणीय

भौगोलिक संरचना अन्य नगरपालिकाओं से अलग तथा विशेष है। यहाँ एनजीटी का दखल है तथा उसके नियम भी लागू हैं। यह तय है कि सरई, आम,साजा,जामुन से आच्छादित पहाडों से घिरे नर्मदा उद्गम की सांसे तब थमती दिख रही हैं, जब इसके आसपास भयावह तरीके से कंक्रीट के पक्के मार्ग, भवन ,अन्य संरचनाओं का निर्माण किया गया है। कंक्रीट के मार्ग निर्माण मे हुई धांधली अपनी जगह ,इसने नदी, बांधों मे जाने वाले जल प्रवाह को रोक दिया है। रामघाट तथा मन्दिर के ठीक पीछे एनजीटी के नियमों तथा लोगों की आस्थाओं की धज्जियां उडा कर शौचालय बनवा दिये गये। आरोप तो यहाँ तक हैं कि नगर पंचायत एवं न्यास से जुडे कुछ प्रभावशाली लोगों के प्रश्रय मे मन्दिर तथा नर्मदा के आसपास जमकर अतिक्रमण एवं पक्के निर्माण करवाए गये। इन सबसे यहाँ के जागरुक पर्यावरण प्रेमियों , मन्दिर के पुजारियों मे बहुत नाराजगी है। जिले के बहुत से समाजसेवियों, जन प्रतिनिधियों, पत्रकारों तथा  नगरपंचायत अमरकंटक के कुछ प्रबुद्ध पार्षदों ने इस पर चिंता जाहिर कर कमिश्नर शहडोल, कलेक्टर अनूपपुर से अमरकंटक एवं जिले मे पर्यावरण - जल संरक्षण के लिये प्रभावी कदम उठाने ,कडी कार्य वाही करने की मांग की है। बता दें कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मार्गदर्शन में नर्मदा सेवा यात्रा के दॊरान तथा अन्य अवसरों पर जिला प्रशासन के नेतृत्व में प्रतिवर्ष  करोड़ो पौधे लगाए गये। वन विभाग के द्वारा लगाए गये पौधों को छोड दें तो अधिकांश पॊधे रख रखाव की कमी से सूख गये। जानकारों का मानना है कि एनजीटी के नियमों का पालन कर, वृक्षारोपण कर एवं तालाब - नदी- कुऎं संरक्षण के बिना जल संकट से नहीं निपटा जा सकता। अमरकंटक बायोस्फीयर क्षेत्र मे कानूनी,गैर कानूनी उत्खन को सख्ती से रोकना होगा। इसके बिना पर्यावरण संरक्षण की बात बेमानी है।

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