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पूर्व CM बाबूलाल गौर का 89 साल की उम्र में निधन, लंबे समय से थे बीमार | BHOPAL NEWS



भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री औऱ बीजेपी के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर का निधन हो गया है। लंबी बीमारी के बाद मंगलवार देर रात उन्होंने भोपाल के निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। गौर की पार्थिव देह आज 12:30 बजे उनके निवास से प्रदेश भाजपा कार्यालय के लिए रवाना होगी। जहां भाजपा कार्यकर्ता और नागरिक उनके अंतिम दर्शन करेंगे। तत्पश्चात उनकी अंतिम यात्रा भोपाल के सुभाष नगर  विश्राम घाट की ओर रवाना होगी। दोपहर 2:00 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

89 वर्षीय बाबूलाल गौर की मंगलवार को तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी, उनका ब्लड प्रेशर कम होने के साथ पल्स रेट भी गिर गया था।  बाबूलाल गौर की किडनी पूरी तरह काम नहीं कर रही थी। कुछ दिन पहले उन्हें भोपाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।वे पिछले 15 दिनों से नर्मदा अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। गौर को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। इसके अलावा उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था।

आपको बता दें कि बीते 7 अगस्त को पूर्व सीएम बाबूलाल गौर की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें नर्मदा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाबूलाल गौर को फेफड़ों में इन्फेक्शन की शिकायत के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां प्रारंभिक जांच के बाद उनमें निमोनिया के लक्षण पाए गए। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें आईसीयू में रखने का फैसला किया । गौर की हालत चिंताजनक है, उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया है।अब ।वह किसी को पहचान नही पा रहे है। एंजियोप्लास्टी के बाद से कमजोरी बढ़ गई है। हृदय भी कमजोर हो गया है। उम्र के कारण रिकवरी धीमी हो रही है।

बीते कई दिनों से चल रहे है बीमार

बता दें कि पिछले महीने हार्ट में परेशानी के चलते गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में बाबूलाल गौर को भर्ती करवाया गया था। उनकी एंजियोग्राफी की गई, जिसमें पाया गया कि तीन नसें बंद हैं। वहीं, उस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री की उम्र अधिक होने के कारण डॉक्टर तय नहीं कर पा रहे थे कि सर्जरी की जाए या नहीं। बताया गया कि डॉक्टरों की कोशिश थी कि दवाओं से राहत दिलाई जाए, क्योंकि ज्यादा उम्र होने कारण सर्जरी के दौरान खतरा हो सकता है।अप्रैल में उन्हें ब्रेन स्ट्रोक आया था। वे लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहे। जुलाई के दूसरे पखवाड़े में उन्हें हार्ट की दिक्कत आने के बाद एक बार फिर से उन्हें भोपाल के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया।

विधायक से सीएम तक रह चुके है गौर

आपको बता दें कि बाबूलाल गौर 23 अगस्त 2004 से 29 नवंबर 2005 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनके बाद शिवराज सिंह चौहान सूबे के मुख्यमंत्री बने थे। बाबूलाल गौर लगातार 10 बार गोविंदपुरा विधानसभा सीट से विधायक रहे हैं। 2018 के चुनाव में पार्टी ने उनकी जगह उनकी बहू कृष्णा गौर को टिकट दिया था। कृष्णा गौर गोविंदपुरा से पहली बार विधायक बनी हैं।

बीजेपी-कांग्रेस के नेताओं ने जताया शोक


लंबा जीवन जनता के लिए समर्पित किया-पीएम मोदी

पीएम नरेंद्र मोदी ने बाबू लाल गौर को श्रद्धांजलि दी है।मोदी ने ट्वीट करके गौर को श्रंद्धाजलि दी है।मोदी ने लिखा है कि बाबू लाल गौर जी ने लंबा जीवन जनता के लिए समर्पित किया। मुख्यमंत्री ओर मंत्री के रूप में किये विकास कार्य हमेशा याद रखे जायेंगें। बाबूलाल गौर जी का लम्बा राजनीतिक जीवन जनता-जनार्दन की सेवा में समर्पित था। जनसंघ के समय से ही उन्होंने पार्टी को मज़बूत और लोकप्रिय बनाने के लिए मेहनत की। मंत्री और मुख्यमंत्री के रूप में मध्यप्रदेश के विकास के लिए किए गए उनके कार्य हमेशा याद रखे जाएंगे।बाबूलाल गौर जी के निधन से गहरा दुःख हुआ। ईश्वर शोक संतप्त परिवार को दुःख की इस घड़ी में धैर्य और संबल प्रदान करे। ओम शान्ति!

राजनीति में एक युग की समाप्ति-शिवराज
 

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर श्रद्धांजलि दी है।उन्होंने लिखा है कि मध्यप्रदेश की राजनीति में एक युग की समाप्ति हुई। बीजेपी के आधार स्तंभ, पूर्व मुख्यमंत्री, हमारे मार्गदर्शक व जन-जन के नेता श्री बाबूलाल गौर के निधन से दुःखी हूँ। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें व परिजनों को इस गहन दुःख को सहने की क्षमता प्रदान करें। आदरणीय बाबूलाल गौर को सत्य के लिए लड़ने वाले सिपाही और मज़दूरों, गरीबों व कमज़ोर वर्ग के हितों के रक्षक के रूप में सदैव याद किया जायेगा।उन्होंने आगे लिखा कि गोवा मुक्ति आंदोलन से लेकर आपातकाल तक में पुलिस की लाठियों का निडरता से सामना करने वाले नायक युगों युगों तक हमारे दिलों में जिंदा रहेंगे।आदरणीय बाबूलाल गौर जी अपने परिश्रम के बल पर शून्य से शिखर पर पहुँचे। 1974 में जब वे चुनाव में खड़े हुए, तब मैंने उनके लिए काम किया, एक तरह से तभी मेरे राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई। आपातकाल के समय उनका सानिध्य मिला, जेल के माहौल को मज़ाकिया अंदाज़ में हल्का करने की वे कोशिश करते।शिवराज ने लिखा है कि किसी विधानसभा क्षेत्र का विकास करना सीखना हो तो बाबूलाल गौर जी से सीखें। गोविंदपुरा क्षेत्र से उन्होंने चुनाव जीतना प्रारंभ किया तो पीछे मुड़कर नहीं देखा, एक ही क्षेत्र से इतने बार जीतकर उन्होंने एक रिकॉर्ड बनाया। यह जनता की सेवा और जनता के प्रति उनके समर्पण से ही संभव हो सका।ऐसे जनसेवक और संघर्ष के पर्याय रहे आदरणीय बाबूलाल गौर जी के चरणों में मैं अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।

मैंने एक अच्छा राजनीतिक साथी खो दिया है- दिग्विजय सिंह

 

पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद  दिग्विजय सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर के निधन पर गहरा दुःख प्रकट किया है। सिंह ने कहाराजनीतिक जीवन में हम दो ध्रुवों पर रहे लेकिन व्यावहारिक रूप से वो मेरे दिल के बेहद क़रीब थे। जब भी मिले पूरी गर्मजोशी के साथ मिले। जो भी किया पूरी ईमानदारी से किया। ग़ौर साहब के निधन से उन्होंने एक अच्छा राजनीतिक साथी खो दिया है। श्री सिंह ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने एवं परिजनों को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

संगठन को मजबूत करने में निभाई महत्वपूर्व भूमिका-राकेश सिंह

 

बाबूलाल गौर के निधन पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने दुख जताया. राकेश सिंह ने कहा, 'यह कहते हुए अत्यंत दुःख हो रहा है कि हमारे मार्गदर्शक भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री बाबूलाल जी गौर अब हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने प्रदेश में संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. ईश्वर दिवंगत आत्मा को श्रीचरणों में स्थान प्रदान करे।

बीजेपी को मजबूत करने का काम किया-गोपाल भार्गव

 


नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि बेहद ही दुःखद समाचार प्राप्त हुआ है। बीजेपी परिवार के वरिष्ठ सदस्य एवं मार्गदर्शक, पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय श्रीबाबूलाल जी अब हमारे बीच नही रहे। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों मे स्थान एवं इस घड़ी का सामना करने की परिवारजन को शक्ति प्रदान करे।आदरणीय बाबूलाल जी ने मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी को मजबूत करने में अपना सर्वस्व अर्पण किया। मध्य प्रदेश के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है। वे एक अपराजेय योद्धा रहे। उनके निधन से मध्यप्रदेश ने अद्भुत नेता खोया है।
























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