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ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित होगा रीवा सतना रेल मार्ग | REWA NEWS



रीवा। तीन साल पहले शुरू किया गया रीवा-सतना रेलमार्ग को ग्रीन कारिडोर के रुप में विकसित करने का पूरा हो गया। रीवा से चलने वाली व आने वाली सभी ट्रेनों में बॉयो टॉयलेट लगाने काम पूरा हो गया है। इसके बाद अब सतना-रीवा रेलमार्ग को ग्रीन कारिडोर के रुप में विकसित करने का प्रस्ताव जबलपुर मुख्यालय भेजा जा रहा है। वहां से स्वीकृत मिलने के बाद ग्रीन कारिडोर घोषित करने को लेकर दावेदारी प्रस्तुत की जाएगी। इस तरह पश्चिम मध्य रेलवे का यह पहला ग्रीन कॉरिडोर होगा।

बताया जा रहा है कि वर्ष 2016 में रेलवे के जीएम निरीक्षण के दौरान रीवा-सतना रेल मार्ग को ग्रीन कॉरिडोर के रुप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए रीवा से गुजरने वाली सभी ट्रेनों में जल्द बॉयो टॉयलेट लगाने के निर्देश दिए गए थे। इसके तहत तीन वर्षो के अंदर रीवा से चलने वाली सभी ट्रेनों में बॉयो टॉयलेट लगाने काम पूरा हो चुका है। पश्चिम मध्य रेलवे के अलावा उत्तर एवं दक्षिण रेलवे की ट्रेनों में भी बॉयो टॉयलेट लग चुके है। इसके अतिरिक्त रीवा-सतना रेलमार्ग में अन्य रुटों की यात्री ट्रेन नहीं है। इसे देखते हुए 50 किलोमीटर के इस रेलमार्ग को ग्रीन कारिडोर घोषित किया जाना है।

इन ट्रेनों में लग चुके है बॉयो टॉयलेट
रीवा रेलवे स्टेशन से चलने वाली इंटरसिटी सुपरफॉस्ट, रीवा-चिरमिरी फॉस्ट सवारी गाड़ी, बिलासुपर एक्सप्रेस, आनंद विहार-रीवा एक्सप्रेस, शटल सवारी गाड़ी, रेंवाचल सुपरफॉस्ट शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सप्ताहिक ट्रेनों में रीवा -ांबेडकर नगर , रीवा-नागपुर, रीवा-राजकोट, रीवा-बडा़ेदरा एवं हालीडे स्पेशल शामिल हैं।

यह होगा फायदा-
पश्चिम मध्य रेलवे ने प्लेटफार्म व ट्रैक में गिरने वाले मल को रोकने के लिए बॉयो टॉयलेट लगाए गए है। इससे प्लेटफार्म में मल से फैलने वाली गंदगी एवं दुंर्गध से यात्रियों को राहत मिलेगी। साथ ही प्लेटफार्म के ट्रैक की सफाई के लिए वॉङ्क्षशग एप्रॉन का निर्माण किया गया है। वांशिंग एप्रॉन से सफाईकमिर्यों को भी सुगमता होगी।

रेलवे कोच में आने वाले शौचालय की दुंर्गंध को कम करने के लिए नई तकनीक को अपनाने जा रहा है। इससे यात्रियों को कोच के अंदर दुर्गंध की समस्या से निजात मिलेगी। इस दिशा में भी रेलवे ने पहल की है।

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