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आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था से वास्तविक वंचित को अभी तक नहीं मिला कोई लाभ : भानु तोमर । sapaks


भोपाल : सपाक्स समाज संस्था एवं सपाक्स अधिकारी कर्मचारी संस्था एट्रोसिटी एक्ट के प्रावधानों के दुरुपयोग का मुद्दा लगातार उठाती रही है इस संबंध में हाल ही में सरकार द्वारा किए गए संशोधन को माननीय न्यायालय ने सही ठहराया है । संस्था का मानना है कि इस निर्णय से विभिन्न वर्गों के बीच समता का भाव पैदा होने की जगह दूरियां और बढ़ेगी।

 पूर्व में भी यह स्पष्ट हो चुका है कि एट्रोसिटी एक्ट के अधिकांश मामले दुर्भावनापूर्ण भाव से दायर किए जाते जो कि बाद में जांच के दौरान  झूठे पाए जाते हैं।

इसी प्रकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय के पदोन्नति में आरक्षण संबंधी वर्तमान निर्णय पर देश के प्रमुख राजनीतिक दलों ने असंतोष व्यक्त किया है एवं गंभीर प्रतिक्रियाएं दी हैं इन दलों की मांग है कि आरक्षण को नौवीं अनुसूची में रखा जाकर स्थाई कर दिया जावे जो पूरी तरह से गलत है एवं यदि ऐसा किया जाता है तो देश भर में एक गंभीर संकट उत्पन्न होगा। सपाक्स समाज संस्था का स्पष्ट मत है कि आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है। जैसा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है ।

आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था से वास्तविक वंचित वर्ग को  अभी तक कोई लाभ नहीं मिल रहा है यह इस बात से भी स्पष्ट होता है कि उसी वर्ग विशेष में से मध्यप्रदेश के नीमच जिले  एक युवक द्वारा हाल ही में आरक्षण की समीक्षा किए जाने के संबंध में याचिका दायर की गई है। जो  माननीय  उच्च न्यायालय द्वारा स्वीकार भी की जा चुकी है।

 वंचित वर्ग के अधिकांश लोगों का मानना है कि वर्तमान आरक्षण व्यवस्था से उन्हीं के वर्ग का एक अभिजात्य हिस्सा लाभान्वित हो रहा है। जबकि अधिकांश आरक्षण के पात्र व्यवस्था के लाभ से वंचित हैं।

उपरोक्त मुद्दों पर  सपाक्स के जन आंदोलन से निकले एक राजनीतिक दल द्वारा सामाजिक लोगों की संस्था सपाक्स समाज की आड़ में  राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है साथ ही यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि सपाक्स पार्टी को गैर राजनीतिक संगठन सपाक्स समाज  एवं सपाक्स अधिकारी कर्मचारी संस्था का समर्थन प्राप्त है, जो की वास्तविक स्थिति मे सत्य नहीं है। सपाक्स समाज संस्था एक गैर राजनीतिक संस्था है एवं इसका किसी भी राजनैतिक दल से कोई संबंध नहीं है।

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