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राजनीति के दो चाणक्यों के मिलन का साक्षी बना अनूपपुर.शंकर बाबू से राजेन्द्र शुक्ल की सौजन्य भेंट.

राजनीति के दो चाणक्यों के मिलन का साक्षी बना अनूपपुर.

शंकर बाबू से राजेन्द्र शुक्ल की सौजन्य भेंट.

अनूपपुर / 14 अक्टूबर की अनूपपुर की धरा राजनीति के दो चाणक्यों के मिलन का साक्षी बना। विंध्य की आज की राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले म प्र शासन के पूर्व कद्दावर मंत्री पं राजेन्द्र शुक्ल अचानक नगर के सबसे बुजुर्ग, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता, लेखक एवं समाजसेवी पं शंकर प्रसाद शर्मा के निवास पर सौजन्य भेंट हेतु पहुंचे। शंकर बाबू को किसी समय अनूपपुर जिले की राजनीति का चाणक्य माना जाता रहा है। जिला गठन से पूर्व तत्कालीन संयुक्त शहडोल जिले की कांग्रेसी राजनीति में यह जाना माना चेहरा रहा है। जबकि राजेन्द्र शुक्ल को प्रदेश भाजपा सरकार में सबसे कद्दावर मंत्रियों में शुमार किया जाता रहा है। उन्हे विंध्य की राजनीति का आज का चाणक्य कहा जाता है।
    विंध्य के अंतिम छोर पर स्थित अनूपपुर की धरती पर दो चाणक्यों के बीच की यह बैठक राजनीति से परे सहज - मधुर वातावरण में हुई । शुक्ला जी के पिता श्री स्व भैया लाल जी को याद करते हुए शंकर बाबू ने इस क्षेत्र में उनके किये तमाम कार्यों को याद किया। श्री शर्मा ने बतलाया कि स्व भैया लाल शुक्ला द्वारा जहाँ - जहाँ पुलों का निर्माण तब कराया गया, वहाँ - वहाँ उन्होंने मन्दिर जरुर बनवाया था। यदि किसी पुल के किनारे मन्दिर बना हो तो लोग समझ जाते हैं कि यह पुल रीवा के शुक्ला परिवार द्वारा बनवाया गया है। अनूपपुर कलेक्ट्रेट के बगल में सोन नदी पर बना पुल तथा मन्दिर तब भैया लाल शुक्ला जी ने बनवाया था।
तत्कालीन मुख्यमंत्री शंभू नाथ शुक्ल से लेकर आज के बदलते परिवेश पर दोनों दिग्गजों के बीच चर्चा हुई। श्री शुक्ला ने शंकर बाबू के स्वास्थ्य ,उनके परिवार के सदस्यों का कुशल क्षेम के बारे में सवाल किये। शंकर बाबू की उम्र लगभग 90 वर्ष की है। उनके स्वाध्याय की आदत उन्हे आज भी लिखने की प्रेरणा देती है। उन्होंने शुक्ला जी को बतलाया कि वे एक नई पुस्तक लेखन पर कार्य कर रहे हैं। शंकर बाबू ने गदगद भाव से राजेन्द्र शुक्ला जी को आशीर्वाद प्रदान किया। इस ऐतिहासिक पल का पूर्व विधायक रामलाल रौतेल, राजेश पाण्डेय, मनोज द्विवेदी, रामनारायण पाण्डेय, एच एस वर्मा, विनोद शर्मा को साक्षी बनने का अवसर प्राप्त हुआ।

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