गाजियाबाद में 'हाउस टैक्स संग्राम' खत्म, करीब 5 लाख लोगों को मिली राहत, जानिए कब क्या-क्या हुआ?
Updated on
11-03-2026 01:30 PM
गाजियाबाद: करीब दो वर्षों से चल रहे गाजियाबाद के हाउस टैक्स विवाद का आखिरकार पटाक्षेप हो गया है। 10 मार्च को शासन ने नगर निगम द्वारा लागू की गई बढ़ी हुई हाउस टैक्स दरों को रद्द करने का फैसला लिया। अब शहर के करीब पांच लाख करदाताओं से हाउस टैक्स पुरानी दरों पर ही वसूला जाएगा। यह निर्णय मेयर सुनीता दयाल की लखनऊ में शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया।2024 में शुरू हुआ था विवाद
दरअसल, हाउस टैक्स विवाद की शुरुआत वर्ष 2024 में हुई थी। उस समय नगर निगम ने टैक्स निर्धारण की पुरानी व्यवस्था को बदलते हुए शासन से नया टैक्स स्लैब पास करा लिया। इसके बाद मार्च 2025 से डीएम सर्किल रेट यानी जमीन की सरकारी कीमत को आधार बनाकर नई दरें लागू कर दी गईं।नई व्यवस्था लागू होने के बाद हाउस टैक्स में 200 से 300 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो गई। जिस फ्लैट का वार्षिक टैक्स पहले तीन से साढ़े तीन हजार रुपये होता था, वह बढ़कर सीधे 20 से 30 हजार रुपये तक पहुंच गया। इससे खासकर मध्यम वर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ गया।शहर में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन
नगर निगम के फैसले के खिलाफ शहर में व्यापक विरोध देखने को मिला। विभिन्न कॉलोनियों और सोसायटियों के लोगों ने प्रदर्शन किए, ज्ञापन सौंपे और कई जगह विरोध सभाएं आयोजित की गईं। कुछ सामाजिक संगठनों और निवासियों ने इस मुद्दे को लेकर अनशन भी किया।जून 2025 में हुई नगर निगम की बोर्ड बैठक में मेयर सुनीता दयाल ने निगम के कुछ अधिकारियों पर टैक्स वसूली में करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की। इससे विवाद और गहरा गया। बैठक में मौजूद सांसद और विधायक भी बढ़े हुए टैक्स को वापस लेने या कम करने के पक्ष में दिखाई दिए।बोर्ड बैठक के फैसले के बावजूद भेजे गए नोटिस
बोर्ड बैठक में बढ़ा हुआ टैक्स न लेने का निर्णय लिया गया था, लेकिन इसके बावजूद निगम अधिकारियों ने बढ़ी हुई दरों पर ही टैक्स वसूली के नोटिस जारी कर दिए। इसके विरोध में बीजेपी सहित कई दलों के पार्षद निगम परिसर में ही धरने पर बैठ गए।हाईकोर्ट में भी पहुंचा मामला
जुलाई 2025 में तीन पूर्व पार्षदों अनिल स्वामी, राजेंद्र त्यागी समेत अन्य लोगों ने टैक्स बढ़ोतरी को गैरकानूनी बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। करीब नौ महीने बाद 27 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी और निगम के फैसले को वैध ठहरा दिया।कोर्ट के इस फैसले के बाद शहर में एक बार फिर विरोध तेज हो गया। लोगों ने पार्षदों, मेयर, सांसद और स्थानीय विधायकों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिए।विशेष बोर्ड बैठक में भी हुआ हंगामा
8 मार्च 2026 को नगर निगम की विशेष बोर्ड बैठक में हाउस टैक्स के मुद्दे पर करीब चार घंटे तक जोरदार हंगामा हुआ। पार्षदों ने बढ़ा हुआ टैक्स वापस लेने की मांग की, लेकिन नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने इसे मानने से इनकार कर दिया और फैसला शासन पर छोड़ दिया।
इसी बैठक में वार्ड 33 के पार्षद धीरेंद्र यादव (बिल्लू) ने विरोध में इस्तीफा भी दे दिया। हालांकि बैठक में लोगों को राहत देने के लिए 77 से 90 प्रतिशत तक की छूट देने की घोषणा की गई, लेकिन इससे भी जनता का गुस्सा शांत नहीं हुआ।
शासन ने बढ़ी हुई दरें रद्द कीं
इसके बाद 10 मार्च को मेयर सुनीता दयाल लखनऊ पहुंचीं और शासन के सामने शहर के लोगों की नाराजगी और आर्थिक बोझ का मुद्दा रखा। चर्चा के बाद शासन ने बढ़ी हुई हाउस टैक्स दरों को रद्द कर दिया और पुरानी दरों पर ही टैक्स वसूली का फैसला लिया।
मेयर ने खुद लखनऊ से यह जानकारी लोगों को दी। फैसले के बाद शहर में राहत का माहौल है और सोशल मीडिया पर लोग इसे करीब पांच लाख परिवारों के लिए बड़ी राहत बता रहे हैं।